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जीएसटी लागू होने से सामान और सेवाओं की कीमतों में फेरबदल होने वाला है और कंपनियों को इन नियमों का पालन करना होगा, नहीं तो उनके लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने से भारत के अप्रत्याशित कर प्रणाली (इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम) में भारी फेरबदल होने वाला है। हालांकि, अभी कुछ मुद्दों पर अंतिम फैसला होना बाकी है, लेकिन सरकार इस कोशिश में जुट गई है कि नया टैक्स सिस्टम लागू होने में कोई बड़ी मुश्किल न आए। इसमें नए टैक्स सिस्टम के तहत कंपनियों के मुनाफाखोरी पर लगाम लगाना शामिल है।

आइए जानते हैं कि किस तरह जीएसटी के संबंध में मुनाफखोरी को रोका जाएगा।

मुनाफाखोरी और उसपर लगाम

बाकी देशों के विपरीत भारत में बहु-स्तरीय जीएसटी प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही, जीएसटी से जुड़े नए नियमों को समझने में आम आदमी को परेशानी हो सकती है। ऐसे में संभव है कि कुछ कंपनियां इस बात का फायदा उठाने की कोशिश करें। इसको देखते हुए ही सरकार ने मुनाफाखोरी को रोकने के लिए कदम उठाने की योजना बनाई है और नए नियमों ॆका गलत इस्तेमाल करने वालों पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाने वाली है।

 

डीजीएसटीआई

जीएसटी लागू होने के बाद देश में नए टैक्स नियमों का पालन के देखरेख के लिए सरकार ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीएसटीआई) की स्थापना की है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश के हर राज्य में कम से कम एक डीजीएसटीआई यूनिट स्थापित की जाएगी। डीजीएसटीआई यूनिट कई राज्यों में पहले से मौजूद डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलिजेंस (डीजीसीईआई) की जगह लेगी। डीजीएसटीआई का मुख्य उद्देश्य जीएसटी के नियमों की अनदेखी के बारे में जानकारी हासिल करना और ऐसे व्यक्ति, कंपनी या संस्था की पहचान करना है। सामानों के मूल्यांकन और माल के वर्गीकरण के नियमों में पेंच को लेकर भी डीजीएसटीआई जीएसटी प्राधिकारियों को राय देगा।

सेक्शन 171

जीएसटी एक्ट के सेक्शन 171 के तहत कंपनियों को अपने टैक्स में हुई बचत का फायदा ग्राहकों को पहुंचाना होगा। ऐसा सामान या सेवा की कीमत में टैक्स बचत के बराबर कटौती करके किया जा सकता है। सरकार इस बात की जांच कर सकती है कि टैक्स कम होने से कीमतें कम हुई हैं या नहीं। डीजीएसटीआई की स्थापना से सरकार साफ कर दिया है कि मुनाफाखोरी करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ये कैसे काम करेगा

नए टैक्स नियमों का मतलब है कि ज्यादातर वस्तुओं की कीमत बदलेगी। इसका ये एक उदाहरण है।

फिलहाल रेगुलर पिजा की कीमत है 250 रुपये।

पिजा ब्रेड पर मौजूदा टैक्स दर 12 फीसदी है।

जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स दर घटकर 5 फीसदी हो जाएगी।

इससे पिजा की कीमत में भी कमी होने की उम्मीद है।

जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी उनके खिलाफ सरकार कदम उठा सकती है।

अंत में

हर कारोबार के लिए मुनाफा कमाना जरूरी है, लेकिन मुनाफाखोरी करने पर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से उन्हें मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए यही समझदारी होगी कि ग्राहकों को कीमत की कटौती का फायदा पहुंचाया जाए। ऐसा न करने पर सरकार आपके खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है।