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ब्याज से प्राप्त आय के बारे में जानकारी न देना, संचित आय को अनदेखा करना|

1. ब्याज से प्राप्त आय के बारे में जानकारी न देना

हालांकि सावधि जमाओं, आवर्ति जमाओं, कर से छूट वाले बैंक जमाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर बोंड से प्राप्त ब्याज की आय पूरी तरह से कर योग्य है, लेकिन लोग 10000 रुपये से कम की ब्याज आय के बारे में जानकारी नहीं देते। प्रतिवर्ष सेक्शन 80 टीटीए के अंतर्गत 10000 रुपये की छूट केवल उस ब्याज पर लागू होती है जो बचत खाते से प्राप्त होता है। ऐसा होने पर भी आपको इसे आईटीआर में घोषित करना चाहिए और इसके बाद छूट का दावा करना चाहिए।

एक अन्य सामान्य गलत धारणा यह है कि व्यक्ति को कर देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आय पर टीडीएस काट लिया गया है। जिस बात को लोग भूल जाते हैं वह यह है कि बैंक द्वारा काटा गया टीडीएस 10 प्रतिशत की दर पर होता है। लेकिन टैक्स स्लैबों में भिन्नता हो सकती है। इसलिए अगर आप एक उच्च टैक्स स्लैब के अंतर्गत आते हैं तो आपका उत्तरदायित्व अधिक हो सकता है और रिटर्न फाइल करते समय आपको शेष राशि का भुगतान करना पड़ता है। ClearTax.com के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता कहते हैं, ”कई लोग अपनी देनदारियों की पुनःगणना करना भूल जाते हैं और उनके पास नोटिस आ जाता है और वे ब्याज और जुर्माने सहित अधिक कर प्रदान करते हैं।“

विभाग आपके आईटीआर की तुलना फार्म 26 ए.एस के साथ करके इस प्रकार की गलतियों को पकड़ सकता है। कर अधिकारी और अधिक गहराई तक जा सकता है और वह टीडीएस से भी आगे बढ़ सकता है। यह जमाओं और ब्याज से प्राप्त आय का भी पता लगा सकता है जहां टीडीएस नहीं काटा गया होता, अर्थात जहां आपने फार्म 15 जी/एच जमा किया है। जुर्माना अधिक लगता है (बचे गए कर का 200 प्रतिशत तक) क्योंकि यह गलत गणना नहीं है बल्कि आय का छिपाना है।

2. संचित आय को अनदेखा करना

कई लोग जीवन साथी या बच्चों के नाम पर निवेश करते हैं। आप अपने जीवन साथी को कितनी धन राशि दे सकते हैं इसकी कोई सीमा नहीं है, लेकिन अगर आप उपहार में दी गई राशि को निवेश करते हैं, तो आयकर अधिनियम की धारा 64 लागू होती है, जो संचित आय के लिए प्रावधान करता है। इसके अंतर्गत उपहार में दी गई राशि से प्राप्त कोई भी आय आपकी कर योग्य आय में जोड़ी जाएगी। Deloitte Haskins & Sells LLP की हिस्सेदार तापती घोष कहती हैं, ”इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके जीवन साथी की कोई आय है या नहीं। उस पैसे को आपकी आय में जोड़ा जाएगा।“ छोटे बच्चे के लिए आय को उस अभिभावक की आय माना जाएगा जो ज्यादा कमाता है। आप प्रति बालक के हिसाब से अधिकतम 2 बच्चों तक 1500 रुपये वार्षिक छूट प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप कर से बचना चाहते हैं तो उपहार में दिए गए धन को कर मुक्त विकल्प में निवेश कीजिए जैसे पीपीएफ या ईएलएसएस योजना। या अपने माता पिता के नाम पर या अपने वयस्क बालक के नाम पर निवेश कीजिए जहां संचय संबंधी प्रावधान लागू नहीं होता।

3. रिटर्न न भरना

अगर आप सोचते हैं कि आपको रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपके पास कोई कर संबंधी देनदारी नहीं है, तो आप गलत हैं। यह छूट केवल उन लोगों के लिए होती है जिनकी वार्षिक सकल आय 2.50 लाख के आधारभूत छूट के स्तर से नीचे है। इससे अधिक आय वाले किसी भी व्यक्ति को रिटर्न भरना पड़ता है। 60 वर्ष की आयु से कम के लोगों के लिए आधारभूत छूट 2.5 लाख रुपये वार्षिक, 60 साल से अधिक आयु के वृद्धों के लिए 3 लाख रुपये और 80 साल से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह छूट 5 लाख रुपये तक है।  एनआरआई सहित बाकी सभी लोगों को रिटर्न भरना पड़ता है। अगर आप अपना रिटर्न समय पर नहीं भर पाते हैं तो कर अधिकारी आप पर सेक्शन 271 एफ के अंतर्गत 5,000 रुपये का जुर्माना लगा सकता है।

इसके अलावा ये सीमाएं सकल आय के लिए हैं, अर्थात छूटों और कर विभाजनों से पहले की आय के लिए। इसलिए अगर आपकी वार्षिक आय 4 लाख रुपये है और आप 1.5 लाख रुपये सेक्शन 80 सी के अंतर्गत निवेश करते हैं तो आपकी कर देनदारी शून्य होगी। लेकिन आपको अपना आईटीआर भरना होगा। इसी प्रकार अगर आप टीडीएस के रूप में कर का भुगतान कर चुके हैं तो आपको रिटन फाइल करना होगा।

कई वेतनभोगी लोग आईटीआर नहीं भरते जो 5 लाख रुपये से कम कमाते हैं। इसकी अस्पष्टता का कारण 2011-12 में लागू किया गया अस्थायी नियम है, जहां उन वेतनभोगी लोगों को रिटर्न भरने से छूट प्रदान की गई है जिनकी कर योग्य आय 5 लाख या इससे कम है, और जो बचत खातों से 10000 से कम ब्याज प्राप्त करते हैं, जिसके साथ कोई राशि बकाया नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस नियम को समाप्त किया जा चुका है।

यह भी पढ़ें: वह जो आपको कर रिटर्न फाइल करने के बारे में जानने की जरूरत है

4. पुरानी नौकरी से प्राप्त आय का छूट जाना

चाहे आपने एक पार्ट-टाइम फ्रिलांसर के रूप में एक मात्र चेक प्राप्त किया हो या आपके खाते में नियमित रूप से जमा हुई हो, हर पैसे की जानकारी देनी पड़ती है। अगर आप अपने वर्तमान नियोक्ता को नौकरी बदलने के बारे में सूचित नहीं करते हैं तो इस बात की संभावना है कि आपको कम कर का भुगतान करना पड़े। लेकिन जब आप अपना आय कर रिटर्न भरेंगे उसी समय यह गलती पकड़ी जाएगी। आपको अधिक कर देना पड़ सकता है क्योंकि लाभों को वापिस ले लिया जाएगा। इससे बचने की कौशिश न करें क्योंकि चूककर्ताओं को जुर्माने के रूप में प्रतिमाह वेतन के 1 प्रतिशत की दर से बाकी कर का भुगतान करना पड़ता है।

5. कर मुक्त आय के बारे में जानकारी न देना

कर मुक्त होने का अर्थ यह नहीं है कि यह आपकी राशि नहीं है। आपकी सभी आयों को शामिल किया जाता है चाहे यह पीपीएफ पर प्राप्त ब्याज हो, कर मुक्त बोंड हों, या विशिष्ट रिश्तेदारों से प्राप्त स्टोक और उपहारों से प्राप्त पूंजी लाभ हों। गुप्ता कहते हैं, ”अगर आप इन आयों पर किसी कर के देनदार नहीं हैं तो भी आपके ब्याज की सम्पूर्ण आय के बारे में आईटीआर में जानकारी देनी पड़ती है। बाद मेकं आप विभिन्न धाराओं के अंतर्गत इसके लिए छूट का दावा कर सकते हैं।

 

स्रोत: इकनॉमिक टाइम्स