Common ITR Form: क्या आयकर भरने के अलग-अलग फॉर्म सहज और सुगम बंद कर दिए जाएँगे?

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर भरने के लिए साझा आईटीआर फॉर्म (कॉमन आईटीआर फॉर्म) लाने का प्रस्ताव रखा है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

Common ITR Form: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर भरने के लिए साझा आईटीआर फॉर्म का प्रस्ताव रखा है जिसमें क्रिप्टो करेंसी से प्राप्त मुनाफा भी दर्शाया जा सकेगा। आयकर भरने की प्रक्रिया में सुधार लाते हुए उसे और आसान बनाने की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। टैक्स पोर्टल या प्री फील्ड आईटीआर सभी के लिए एक साझा आईटीआर फॉर्म (कॉमन आईटीआर फॉर्म) का प्रस्ताव है। सीबीडीटी द्वारा इस विषय में सभी हितधारकों और नागरिकों से 15 दिसंबर तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इसका उद्देश्य कॉमन आईटीआर द्वारा कर भरने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाना है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई अच्छे बिंदुओं को भी अपनाने का विचार है। 

क्या है कॉमन आईटीआर फॉर्म 

सीबीडीटी प्लान के साथ ही हितधारकों को सही फॉर्म चुनने की समस्या खत्म हो जाएगी। सभी करदाता अब एक ही कॉमन आईटीआर फॉर्म से टैक्स फाइल कर सकेंगे। इसे वन नेशन वन आईटीआर फॉर्म कहा जाएगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने जानकारी दी है कि ट्रस्ट और एनजीओ (गैर सरकारी संगठनों) को छोड़कर सभी करदाता इस साझा आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

एस आईटीआर फॉर्म में वर्चुअल डिजिटल असेट्स यानी क्रिप्टो करेंसी से प्राप्त लाभ को भी सम्मिलित किया जा सकेगा। सीबीडीटी के अनुसार आईटीआर-7 नवंबर के फार्म को छोड़कर अन्य सभी फॉर्म्स को मिलाकर कॉमन आईटीआर फॉर्म लाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत और गैर कारोबारी करदाताओं के रिटर्न जमा करने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है। 

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

क्या ‘सहज’ (Sahaj ITR form) और ‘सुगम’ (Sugam ITR form) खत्म हो जाएँगे

नहीं। यदि आप यह सोचते हैं कि कॉमन आईटीआर फॉर्म आने से ‘सहज’ और ‘सुगम’ फार्म खत्म हो जाएँगे तो ऐसा नहीं होगा। आईटीआर फॉर्म-1 और 4 आगे भी उपलब्ध रहेंगे। करदाता चाहें तो मौजूदा फार्म आईटीआर 1 और आईटीआर 4 विकल्पों को चुनकर टैक्स फाइल कर सकते हैं। 

अभी के आईटीआर फॉर्म 

मौजूदा व्यवस्था के अनुसार अभी निम्न प्रकार के आईटीआर फॉर्म चलन में हैं,

आईटीआर फॉर्म-1 ‘सहज’ - ₹50 लाख तक की वार्षिक आमदनी के छोटे और मझोले करदाताओं के लिए। इसमें वेतन, मकान- संपत्ति के साथ अन्य स्रोत (ब्याज आदि) से प्राप्त होने वाली आमदनी शामिल है।

आईटीआर फॉर्म-2 – रेसिडेंशियल संपत्ति से प्राप्त आमदनी के लिए इस फार्म का उपयोग किया जाता है। 

आईटीआर फॉर्म-3 - व्यापार या व्यवसाय से प्राप्त आमदनी के लिए प्रयोग में लाया जाता है। 

आईटीआर फॉर्म-4 ‘सुगम’ - ₹50 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों एवं फर्म द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला फॉर्म। 

आईटीआर फॉर्म-5 और 6 - सीमित दायित्व की भागीदारी (LLP) एवं कारोबारियों द्वारा भरा जाने वाला फॉर्म। 

आईटीआर फॉर्म-7 - गैर सरकारी संगठनों और ट्रस्ट के लिए निर्धारित फॉर्म।  

यह भी पढ़ें: मार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

Common ITR Form: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर भरने के लिए साझा आईटीआर फॉर्म का प्रस्ताव रखा है जिसमें क्रिप्टो करेंसी से प्राप्त मुनाफा भी दर्शाया जा सकेगा। आयकर भरने की प्रक्रिया में सुधार लाते हुए उसे और आसान बनाने की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। टैक्स पोर्टल या प्री फील्ड आईटीआर सभी के लिए एक साझा आईटीआर फॉर्म (कॉमन आईटीआर फॉर्म) का प्रस्ताव है। सीबीडीटी द्वारा इस विषय में सभी हितधारकों और नागरिकों से 15 दिसंबर तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इसका उद्देश्य कॉमन आईटीआर द्वारा कर भरने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाना है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई अच्छे बिंदुओं को भी अपनाने का विचार है। 

क्या है कॉमन आईटीआर फॉर्म 

सीबीडीटी प्लान के साथ ही हितधारकों को सही फॉर्म चुनने की समस्या खत्म हो जाएगी। सभी करदाता अब एक ही कॉमन आईटीआर फॉर्म से टैक्स फाइल कर सकेंगे। इसे वन नेशन वन आईटीआर फॉर्म कहा जाएगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने जानकारी दी है कि ट्रस्ट और एनजीओ (गैर सरकारी संगठनों) को छोड़कर सभी करदाता इस साझा आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

एस आईटीआर फॉर्म में वर्चुअल डिजिटल असेट्स यानी क्रिप्टो करेंसी से प्राप्त लाभ को भी सम्मिलित किया जा सकेगा। सीबीडीटी के अनुसार आईटीआर-7 नवंबर के फार्म को छोड़कर अन्य सभी फॉर्म्स को मिलाकर कॉमन आईटीआर फॉर्म लाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत और गैर कारोबारी करदाताओं के रिटर्न जमा करने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है। 

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क्या ‘सहज’ (Sahaj ITR form) और ‘सुगम’ (Sugam ITR form) खत्म हो जाएँगे

नहीं। यदि आप यह सोचते हैं कि कॉमन आईटीआर फॉर्म आने से ‘सहज’ और ‘सुगम’ फार्म खत्म हो जाएँगे तो ऐसा नहीं होगा। आईटीआर फॉर्म-1 और 4 आगे भी उपलब्ध रहेंगे। करदाता चाहें तो मौजूदा फार्म आईटीआर 1 और आईटीआर 4 विकल्पों को चुनकर टैक्स फाइल कर सकते हैं। 

अभी के आईटीआर फॉर्म 

मौजूदा व्यवस्था के अनुसार अभी निम्न प्रकार के आईटीआर फॉर्म चलन में हैं,

आईटीआर फॉर्म-1 ‘सहज’ - ₹50 लाख तक की वार्षिक आमदनी के छोटे और मझोले करदाताओं के लिए। इसमें वेतन, मकान- संपत्ति के साथ अन्य स्रोत (ब्याज आदि) से प्राप्त होने वाली आमदनी शामिल है।

आईटीआर फॉर्म-2 – रेसिडेंशियल संपत्ति से प्राप्त आमदनी के लिए इस फार्म का उपयोग किया जाता है। 

आईटीआर फॉर्म-3 - व्यापार या व्यवसाय से प्राप्त आमदनी के लिए प्रयोग में लाया जाता है। 

आईटीआर फॉर्म-4 ‘सुगम’ - ₹50 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों एवं फर्म द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला फॉर्म। 

आईटीआर फॉर्म-5 और 6 - सीमित दायित्व की भागीदारी (LLP) एवं कारोबारियों द्वारा भरा जाने वाला फॉर्म। 

आईटीआर फॉर्म-7 - गैर सरकारी संगठनों और ट्रस्ट के लिए निर्धारित फॉर्म।  

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