Tax exemption under section 80DDB? धारा 80DDB के अंतर्गत कौन कर सकता है कर में छूट का दावा?

आयकर अधिनियम की धारा 80DDB के अंतर्गत कर में मिलने वाली छूट

 कर में मिलने वाली छूट

Tax exemption under Section 80DDB: आयकर अधिनियम 1961 के भाग VI A की धारा 80C से 80U के अंतर्गत कुल आय पर कर में छूट के बारे में विस्तार से बताया गया है। निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत कर में छूट का प्रावधान है:

धारा 80C जीवन बीमा, पीपीएफ या होम लोन के भुगतान, स्कूल फ़ीस आदि पर कर में अधिकतम 1,50000 रुपए तक की छूट देती है। 

धारा 80D स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के अंतर्गत किए गए प्रीमियम भुगतान पर कर में अधिकतम 25000 रुपए तक और और वरिष्ठ नागरिकों को 50,000 रुपए तक की छूट देती है।

धारा 80DD किसी व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार द्वारा चिकित्सा उपचार या विकलांग व्यक्ति के रखरखाव के खर्च के लिए कर में अधिकतम 75000 रुपए तक की छूट देती है।

धारा 80DDC के अंतर्गत व्यक्ति और हिन्दू अविभाजित परिवार को कुछ विशेष बिमारियों के लिए कर में छूट मिलती है। 

धारा 80DDB 

धारा 80DDB  में रोगों या बीमारियों के संबंध में किए गए चिकित्सा उपचार के खर्चों के लिए कर में छूट का प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार विशेष बीमारी के इलाज पर खर्च करता है तो धारा 80DDB के अंतर्गत उसे चिकित्सा उपचार में किए गए खर्चों के लिए कर में छूट मिलती है पर मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम के लिए छूट नहीं मिलती। 

धारा 80DDB कुछ विशेष चिकित्सा उपचारों पर किए गए खर्चों पर कर में छूट की सुविधा देती है। इसके अंतर्गत कई बीमारियां आती हैं, जिसमें डिमेंशिया, डिस्टोनिया मस्कुलरम डिफॉर्मस, कोरिया मोटर न्यूरोन रोग, एटासिया, पार्किंसंन और हेमबैलिस्म, आदि शामिल हैं। किसी विशेषज्ञ द्वारा निदान किए गए न्यूरोलॉजिकल रोग मे भी छूट संभव है, जिसमे 40% या उससे अधिक विकलांगता का प्रमाण दिया गया हो। इसके अलावा घातक कैंसर, एड्स, क्रोनिक रीनल फेलियर, हेमोफिलिया या थैलेसीमिया जैसे हेमेटोलॉजिकल डिसऑनर के इलाज मे हुए खर्च पर भी कर मे छूट पाई जा सकती। 

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

धारा 80DDB के अंतर्गत कर में छूट का दावा

धारा 80DDB के अंतर्गत केवल खर्च करने वाले व्यक्ति को ही कर में छूट मिलती है। निम्नलिखित स्तिथियों में भी छूट मिल सकती है। व्यक्ति विशेष के मामले में, खर्च करने वाले व्यक्ति पर निर्भर लोगों यानी पति या पत्नी, बच्चे, माता पिता, भाई/बहनों आदि के लिए किए गए चिकित्सा खर्च के लिए कर में छूट का दावा किया जा सकता है। 

हिन्दू अविभाजित परिवार के मामले में, किसी भी सदस्य के चिकित्सा उपचार के खर्च पर कर में छूट मिल सकती है।

इस धारा के अंतर्गत किसी कॉर्पोरेट या अन्य संस्थाओं, या अप्रवासी भारतीयों द्वारा छूट का दावा नहीं किया जा सकता है। 

दावे के लिये जरूरी दस्तावेज

धारा 80DDB के अंतर्गत कर में छूट का दावा करने के लिए चिकित्सा उपचार की आवश्यकता और उपचार वास्तव में कराने का प्रमाण देने के साथ-साथ डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन देना भी आवश्यक है। केवल संबंधित रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन ही मान्य होगा।

प्रिस्क्रिप्शन में निम्नलिखित का होना आवश्यक है:

  • रोगी का नाम
  • रोगी की आयु
  • बीमारी
  • प्रिस्क्रिप्शन देने वाले डॉक्टर का नाम, पता, व रजिस्ट्रेशन नम्बर
  • यदि किसी सरकारी हॉस्पिटल में उपचार हो तो वहां का नाम व पता और प्रिस्क्रिप्शन आवश्यक होंगा ।
  • प्रिस्क्रिप्शन में सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर व इंचार्ज के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

धारा 80DDB  के अंतर्गत मरीज की आयु के आधार पर दावा किया जा सकता है

धारा 80DDB के फार्म में निम्नलिखित भरना होता है:

  • आवेदक का नाम, पता और पिता का नाम।
  • आवेदक जिसका आश्रित उस व्यक्ति का नाम व पता और आवेदक से संबंध।
  • बीमारी या बीमारियों के नाम 
  • विकलांगता 
  • सरकारी अस्पताल के नाम और पते के साथ प्रिस्क्रिप्शन देने वाले विशेषज्ञ का नाम, पता, रजिस्ट्रेशन नंबर और योग्यता
  • उसके बाद हस्ताक्षर करें उसे सत्यापित करें।
     

यह भी पढ़ें: मार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

Section 80DDB of Income Tax Act

Tax exemption under Section 80DDB: आयकर अधिनियम 1961 के भाग VI A की धारा 80C से 80U के अंतर्गत कुल आय पर कर में छूट के बारे में विस्तार से बताया गया है। निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत कर में छूट का प्रावधान है:

धारा 80C जीवन बीमा, पीपीएफ या होम लोन के भुगतान, स्कूल फ़ीस आदि पर कर में अधिकतम 1,50000 रुपए तक की छूट देती है। 

धारा 80D स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के अंतर्गत किए गए प्रीमियम भुगतान पर कर में अधिकतम 25000 रुपए तक और और वरिष्ठ नागरिकों को 50,000 रुपए तक की छूट देती है।

धारा 80DD किसी व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार द्वारा चिकित्सा उपचार या विकलांग व्यक्ति के रखरखाव के खर्च के लिए कर में अधिकतम 75000 रुपए तक की छूट देती है।

धारा 80DDC के अंतर्गत व्यक्ति और हिन्दू अविभाजित परिवार को कुछ विशेष बिमारियों के लिए कर में छूट मिलती है। 

धारा 80DDB 

धारा 80DDB  में रोगों या बीमारियों के संबंध में किए गए चिकित्सा उपचार के खर्चों के लिए कर में छूट का प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार विशेष बीमारी के इलाज पर खर्च करता है तो धारा 80DDB के अंतर्गत उसे चिकित्सा उपचार में किए गए खर्चों के लिए कर में छूट मिलती है पर मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम के लिए छूट नहीं मिलती। 

धारा 80DDB कुछ विशेष चिकित्सा उपचारों पर किए गए खर्चों पर कर में छूट की सुविधा देती है। इसके अंतर्गत कई बीमारियां आती हैं, जिसमें डिमेंशिया, डिस्टोनिया मस्कुलरम डिफॉर्मस, कोरिया मोटर न्यूरोन रोग, एटासिया, पार्किंसंन और हेमबैलिस्म, आदि शामिल हैं। किसी विशेषज्ञ द्वारा निदान किए गए न्यूरोलॉजिकल रोग मे भी छूट संभव है, जिसमे 40% या उससे अधिक विकलांगता का प्रमाण दिया गया हो। इसके अलावा घातक कैंसर, एड्स, क्रोनिक रीनल फेलियर, हेमोफिलिया या थैलेसीमिया जैसे हेमेटोलॉजिकल डिसऑनर के इलाज मे हुए खर्च पर भी कर मे छूट पाई जा सकती। 

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

धारा 80DDB के अंतर्गत कर में छूट का दावा

धारा 80DDB के अंतर्गत केवल खर्च करने वाले व्यक्ति को ही कर में छूट मिलती है। निम्नलिखित स्तिथियों में भी छूट मिल सकती है। व्यक्ति विशेष के मामले में, खर्च करने वाले व्यक्ति पर निर्भर लोगों यानी पति या पत्नी, बच्चे, माता पिता, भाई/बहनों आदि के लिए किए गए चिकित्सा खर्च के लिए कर में छूट का दावा किया जा सकता है। 

हिन्दू अविभाजित परिवार के मामले में, किसी भी सदस्य के चिकित्सा उपचार के खर्च पर कर में छूट मिल सकती है।

इस धारा के अंतर्गत किसी कॉर्पोरेट या अन्य संस्थाओं, या अप्रवासी भारतीयों द्वारा छूट का दावा नहीं किया जा सकता है। 

दावे के लिये जरूरी दस्तावेज

धारा 80DDB के अंतर्गत कर में छूट का दावा करने के लिए चिकित्सा उपचार की आवश्यकता और उपचार वास्तव में कराने का प्रमाण देने के साथ-साथ डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन देना भी आवश्यक है। केवल संबंधित रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन ही मान्य होगा।

प्रिस्क्रिप्शन में निम्नलिखित का होना आवश्यक है:

  • रोगी का नाम
  • रोगी की आयु
  • बीमारी
  • प्रिस्क्रिप्शन देने वाले डॉक्टर का नाम, पता, व रजिस्ट्रेशन नम्बर
  • यदि किसी सरकारी हॉस्पिटल में उपचार हो तो वहां का नाम व पता और प्रिस्क्रिप्शन आवश्यक होंगा ।
  • प्रिस्क्रिप्शन में सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर व इंचार्ज के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

धारा 80DDB  के अंतर्गत मरीज की आयु के आधार पर दावा किया जा सकता है

धारा 80DDB के फार्म में निम्नलिखित भरना होता है:

  • आवेदक का नाम, पता और पिता का नाम।
  • आवेदक जिसका आश्रित उस व्यक्ति का नाम व पता और आवेदक से संबंध।
  • बीमारी या बीमारियों के नाम 
  • विकलांगता 
  • सरकारी अस्पताल के नाम और पते के साथ प्रिस्क्रिप्शन देने वाले विशेषज्ञ का नाम, पता, रजिस्ट्रेशन नंबर और योग्यता
  • उसके बाद हस्ताक्षर करें उसे सत्यापित करें।
     

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Section 80DDB of Income Tax Act

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