नई कर संरचना के तहत वो आय जो कर-मुक्त होगी

इन आय स्रोतों से अर्जित आय से करदाता पर कोई कर देयता नहीं होगी

नई कर संरचना के तहत वो आय जो कर-मुक्त होगी

70 विचित्र कर-कटौती और छूट जो नई कर व्यवस्था ने समाप्त कर दी है, के अलावा, कई प्रमुख आय हैं जिन्हें आयकर से पूरी तरह छूट दी गई है। यह छूट नए आयकर ढांचे के तहत वसूल किये जाने वाले प्रस्तावित कम कर की दरों के अलावा दिया गया है ।

हालांकि, करदाताओं के पास विकल्प है। वे मौजूदा कर व्यवस्था या नए के बीच विकल्प चुन सकते हैं। यदि आप नए को चुनने की योजना बना रहे हैं, तो ध्यान रखें कि आप उन निवेश के खिलाफ कर लाभ का दावा नहीं कर पाएंगे जो धारा 80 सी के तहत किए गए हो या स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, जो धारा 80 डी के तहत भुगतान किए जाते हैं।

एन.पी.एस. खातों से प्राप्त मैच्युरिटी लाभ, पुराने नीतियों के तहत कर-मुक्त थे और वे नए नीति के तहत भी कर-मुक्त रहेंगे। मौजूदा कर नियमों के अनुसार, संचित एन.पी.एस. टियर -1 कोष से 60% तक की निकासी मैच्युरिटी पर बिना कर चुकाए की जा सकती है। शेष 40% को अनिवार्य रूप से एन.पी.एस. खाते की मैच्युरिटी पर, वार्षिकी योजनाओं में निवेश किया जाना चाहिए।

निकासी की बात करे तो, कोई व्यक्ति कर का भुगतान किए बिना एन.पी.एस. खाते से अपने योगदान का 25% तक निकाल सकता है। इस प्रकार,एक निश्चित सीमा तक,मैच्युरिटी और आंशिक निकासी दोनों से प्राप्त भुगतान, कर से मुक्त है। योगदान के मामले में, एन.पी.एस. खाते में किसी कर्मचारी का योगदान अब कर लाभ के लिए योग्य नहीं है। हालांकि, धारा 80CCD (2) के तहत नियोक्ता के योगदान पर कटौती का दावा किया जा सकता है।

आइए अब नई कर व्यवस्था के कुछ और महत्वपूर्ण घटकों को देखें:

1. नियोक्ता से प्राप्त ग्रेच्युटी: निर्दिष्ट ऊपरी सीमाओं के अधीन, नियोक्ता से किसी कर्मचारी द्वारा प्राप्त ग्रेच्युटी भी आयकर से मुक्त होती है। गैर-सरकारी कर्मचारियों के मामले में, कर्मचारी के जीवनकाल में प्राप्त 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी प्राप्तियां आयकर से मुक्त होती हैं। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों के मामले में, प्राप्त की गई ग्रेच्युटी राशि ,आयकर से पूरी तरह से मुक्त होती है। इसी प्रकार, किसी कर्मचारी की मृत्यु के मामले में प्राप्त ग्रेच्युटी को भी आयकर से छूट प्राप्त है; यह किसी भी ऊपरी सीमा के अधीन नहीं है।

2. कम्यूटेड पेंशन: पेंशन फंड का एक हिस्सा कम्यूटेड पेंशन होता है जो सामयिक भुगतान के बजाय एकमुश्त भुगतान द्वारा प्राप्त होता है। नई कर व्यवस्था में इसकी कर प्रणाली पुरानी जैसी ही रहेगी। गैर-सरकारी कर्मचारियों के मामले में, अगर किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी मिलती है, तो कम्यूटेड पेंशन के एक-तिहाई हिस्से को कर में छूट दी गई है। यदि कोई ग्रेच्युटी प्राप्त नहीं होती है, तो आधी कम्यूटेड पेंशन कर-मुक्त होगी।

3. अवकाश - नकदीकरण: गैर-सरकारी कर्मचारियों के मामले में, सेवानिवृत्ति के दौरान प्राप्त अप्रयुक्त (बिना इस्तेमाल की गई) छुट्टी के एवज में कोई भी राशि कर से मुक्त होगी। हालांकि, यह छूट अधिकतम 3 लाख रुपये तक ही लागू है |

4. वी.आर.एस. राशि: स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वी.आर.एस.) के तहत सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को समय से पहले सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनने पर मौद्रिक लाभ प्राप्त होने की संभावना होती है। ऐसे मौद्रिक लाभ पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक की राशि पर कर से छूट मिलेगी।

5. जीवन बीमा पॉलिसी से मैच्युरिटी प्राप्तियां : हालांकि जीवन बीमा पॉलिसी प्रीमियम के भुगतान पर पहले उपलब्ध कर लाभ अब उपलब्ध नहीं है, मैच्युरिटी पर इस तरह की पॉलिसी पर प्राप्त राशि कर मुक्त रहती है। यह छूट धारा 10(10 डी) के तहत उपलब्ध है। हालांकि, इस धारा के तहत यह भी आवश्यक है कि पॉलिसी में सुनिश्चित की गई राशि ,पॉलिसी के एवज में भुगतान किए गए प्रीमियम से कम से कम 10 गुना अधिक होनी चाहिए।

6. डाकघर बचत खाते पर ब्याज आय: डाकघर की बचत पर अर्जित ब्याज आयकर अधिनियम की धारा 10(15)(i) के तहत छूट प्राप्त होती है। हालांकि,अर्जित ब्याज आय में छूट की सीमा 3500 रुपये (व्यक्तिगत खातों के लिए) और 7000 रुपये (संयुक्त खातों के लिए) है। छूट का दावा 'अन्य स्रोतों से आय ’ में सकल कर योग्य आय की गणना करते समय किया जाना चाहिए | धारा 80 टीटीए जिसने सभी बचत खातों से ब्याज आय पर 10,000 रुपये की कटौती लागू की थी, हालांकि,बंद हो जाएगी|

7. ई.पी.एफ. / एन.पी.एस. खाते में नियोक्ता का योगदान: नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के ई.पी.एफ. / एन.पी.एस. में किया गया योगदान या कर्मचारी के पेंशन खाते में किए गए योगदान को कर से छूट प्राप्त है। हालांकि, इन सभी खातों में नियोक्ता का कुल योगदान वित्तीय वर्ष में 7.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। अतिरिक्त योगदान से उत्पन्न होने वाली ब्याज और लाभ कर्मचारी के लिए कर योग्य होंगे।

वर्तमान में, नियोक्ता कर्मचारी के मूल मासिक वेतन का अधिकतम 12% राशि ई.पी.एफ. में योगदान स्वरुप कर सकते हैं। कर्मचारी के टियर -1 एन.पी.एस. खाते में नियोक्ता का अधिकतम योगदान कर्मचारी के मूल वेतन का 10% है। एक नियोक्ता, एक कर्मचारी के पेंशन खाते में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का योगदान कर सकता है। प्रभावी रूप से, उच्च वेतन वाले कर्मचारी 7.5 लाख रुपये की ऊपरी सीमा के कारण ,इस छूट का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे।

8. ई.पी.एफ. पर ब्याज: आपके ई.पी.एफ. खाते से उत्पन्न होने वाली ब्याज आय को कर से मुक्त रखा जाएगा। हालाँकि, छूट केवल 9.5% प्रति वर्ष तक के ब्याज दर पर उपलब्ध है।

9. पी.पी.एफ. की ब्याज और मैच्युरिटी: आप अपने पी.पी.एफ. खाते से जो ब्याज आय अर्जित करते हैं,उसे नई कर प्रणाली में छूट मिली है। इसके अलावा, आपके पी.पी.एफ. खाते के मैच्योर होने पर आपको मिलने वाली मैच्युरिटी राशि भी कर से मुक्त है। मौजूदा प्रणाली में, करदाता द्वारा पी.पी.एफ. खाते में दिए गए योगदान को भी कर से छूट दी गई थी, लेकिन नए प्रणाली के तहत इसे समाप्त कर दिया गया है।

10. सुकन्या समृद्धि योजना: बालिकाओं के लिए बनी इस योजना में उत्पन्न होने वाली ब्याज को नई कर व्यवस्था के तहत भी कर से मुक्त रखा जाएगा। इस योजना से करदाता को मिलने वाली राशि को भी कर से छूट प्राप्त है। और पी.पी.एफ. की तरह ही, सुकन्या समृद्धि योजना में किए गए निवेश, अब धारा 80 सी के हटने के बाद, कर कटौती के लिए पात्र नहीं होंगे।

11. नियोक्ता से उपहार: 5000 रुपये के मूल्य तक के नियोक्ता से प्राप्त उपहार ,नई व्यवस्था के तहत कर मुक्त रहेंगे। यह नियम दोनों प्रणालियों में अपरिवर्तित रहा है।

12. खाद्य कूपन: नियोक्ताओं से प्राप्त खाद्य कूपन को कर से छूट दी जाती है बशर्ते कूपन का मूल्य कम से कम 50 रुपये प्रति भोजन हो। छूट एक दिन में दो से अधिक बार के भोजन के लिए उपलब्ध नहीं है। बजट में एक व्याख्यात्मक ज्ञापन किया गया था जिसमें इस कर छूट को समाप्त करने का प्रस्ताव था। इस आयकर छूट को सरकार से और स्पष्टीकरण की आवश्यकता होगी।

निष्कर्ष में, यह देखा जा सकता है कि ऊपर वर्णित कई छूट पिछले प्रणाली से जारी हैं!

 

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