Planning for a startup : स्टार्ट-अप की कर रहे हैं प्लानिंग, तो पहले जान लें टैक्स लाभ

आपने स्टार्ट-अप के बारे में तो सुना ही होगा। उसके बारे में पूरी जानकारी इस लेख में पढ़िये।

tax benefits for startups

 शायद आपको वो एक लोकप्रिय विज्ञापन याद है, ‘कर लो दुनिया मुट्टी में’। आज कुछ ऐसा ही हो गया है और दुनिया वाकई मुट्ठी में आकर सिमट गई है। कार बुक करनी हो या घर पर मनपसंद खाना मंगवाना, कोई भी प्रोडक्ट ऑनलाइन खरीदना हो या बेचना हो, या फिर पैसों से जुड़े लेन-देन करना हो, हम सब कुछ पलक झपकते कर लेते हैं। जिंदगी को इतना आसान और बेहतर बनाने में स्टार्ट-अप्स की बहुत बड़ी भूमिका है। 

देश में आज स्टार्ट अप्स की लहर सी चल रही है। इस समय भारत 63 स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न के साथ, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न है। स्टार्ट अप से न सिर्फ इकोनॉमी को फायदा होता ही है, बल्कि इससे रोजगार के नए-नए अवसर भी पैदा होते हैं। 


पारंपरिक बिजनेस और स्टार्ट अप में फर्क:

स्टार्ट अप भी एक तरह से बिजनेस ही होता है, लेकिन पारंपरिक बिजनेस से कई मायनों में अलग होता है। जब भी कोई व्यक्ति कोई नया परंपरागत व्यापार शुरू करता है, तो वह बिजनेस या उद्यम कहलाता है, ना कि स्टार्ट-अप। 

स्टार्ट-अप्स आमतौर पर ऐसी ऐसी समस्याओं का समाधान करने में भरोसा रखते हैं, जिसका पहले से कोई समाधान मौजूद नहीं रहता है। ये समाधान प्रोडक्ट के रूप में भी हो सकता है और सर्विस के रूप में भी। स्टार्ट अप्स काफी तेजी के साथ ग्रोथ करने पर जोर देते हैं, पारंपरिक बिजनेस में ऐसा नहीं देखा जा सकता है। इसके अलावा, दोनों में कई और बुनियादी फर्क हैं। 

स्टार्ट अप्स भले ही हमारी जिंदगी को आसान में बनाने में महत्वपूर्व भमिका निभा रहे हैं, लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक, महज 10 प्रतिशत स्टार्ट अप ही सफल हो पाते हैं, बाकी 90 प्रतिशत नाकाम हो जाते हैं। पूंजी की कमी इसकी एक प्रमुख वजह मानी जाती है।  

स्टार्ट अप्स के लिए इनकम टैक्स लाभ:

आप भी अगर स्टार्ट अप की प्लानिंग कर रहे हैं तो भारत में इससे इनकम टैक्स के कई लाभ मिलते हैं। इसमें शामिल हैं: 

  • नए पात्र स्टार्ट-अप को एलटीसीजी (लंबी अवधि पूंजीगत लाभ) पर टैक्स लाभ मिलता है। 
  • एक शख्स वाले नए स्टार्ट अप में निवेश पर भी टैक्स लाभ मिलता है।
  • ₹100 करोड़ नेटवर्थ या ₹250 करोड़ का कारोबार करने वाली सूचीबद्ध कंपनियों के पात्र स्टार्ट-अप में निवेश पर इनकम टैक्स छूट मिलती है।
  • कोई भी स्टार्ट-अप, जिनका सालाना कारोबार ₹100 करोड़ है, वे 10 साल के दौरान किसी भी तीन साल में टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं।
  • प्रवासियों, वैकल्पिक निवेश कोष-श्रेणी-1 द्वारा पात्र स्टार्टअप में ₹25 करोड़ की सीमा के ऊपर के निवेश पर इनकम टैक्स छूट मिलती है।

स्टार्टअप्स को पहले तीन साल की अवधि में होने वाले लाभ पर 100 प्रतिशत कर छूट मिलती है। इसके बाद होने वाले लाभ पर 15 प्रतिशत टैक्स देना होता है। हालांकि, इस योजना का लाभ लेने के लिए वित्तीय वर्ष के दौरान वार्षिक कारोबार 25 करोड़ रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए।

स्टार्ट अप्स के लिए इनकम टैक्स लाभ की शर्तें:

हालांकि, टैक्स लाभ लेने के लिए आपको कुछ शर्तों के पालन करना होगा। इन शर्तों में शामिल है: 

  • स्टार्ट-अप भारत में पंजीकृत हो।
  • अपनी स्थापना या पंजीकरण के बाद 10 साल तक परिचालन कर रही हो। पहले यह समयसीमा सात साल थी। 
  • उसका कारोबार पंजीकरण से लेकर अब तक किसी भी वित्त वर्ष में ₹100 करोड़ से ज्यादा नहीं हो। पहले यह ₹25 करोड़ था।
  • यह एक इकाई होनी चाहिए, जो प्रौद्योगिकी या बौद्धिक सम्पदा से प्रेरित नए उत्पादों या सेवाओं के नवाचार, विकास, प्रविस्तारण या व्यवसायीकरण की दिशा में काम करती हो।
  • ये इकाई पहले से अस्तित्व में व्यापार के विखंडन/पुनर्निर्माण द्वारा गठित नहीं की गई हो।

तो, अगर आपको लगता है कि आपके पास ऐसे आइडियाज हैं जिसे कारोबार में बदलकर आम लोगों की जिंदगी को आसान और बेहतर बनाया जा सकता है, तो स्टार्ट-अप्स को मिल रहे इनकम टैक्स लाभ का फायदा जरूर उठायें। 

 शायद आपको वो एक लोकप्रिय विज्ञापन याद है, ‘कर लो दुनिया मुट्टी में’। आज कुछ ऐसा ही हो गया है और दुनिया वाकई मुट्ठी में आकर सिमट गई है। कार बुक करनी हो या घर पर मनपसंद खाना मंगवाना, कोई भी प्रोडक्ट ऑनलाइन खरीदना हो या बेचना हो, या फिर पैसों से जुड़े लेन-देन करना हो, हम सब कुछ पलक झपकते कर लेते हैं। जिंदगी को इतना आसान और बेहतर बनाने में स्टार्ट-अप्स की बहुत बड़ी भूमिका है। 

देश में आज स्टार्ट अप्स की लहर सी चल रही है। इस समय भारत 63 स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न के साथ, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न है। स्टार्ट अप से न सिर्फ इकोनॉमी को फायदा होता ही है, बल्कि इससे रोजगार के नए-नए अवसर भी पैदा होते हैं। 


पारंपरिक बिजनेस और स्टार्ट अप में फर्क:

स्टार्ट अप भी एक तरह से बिजनेस ही होता है, लेकिन पारंपरिक बिजनेस से कई मायनों में अलग होता है। जब भी कोई व्यक्ति कोई नया परंपरागत व्यापार शुरू करता है, तो वह बिजनेस या उद्यम कहलाता है, ना कि स्टार्ट-अप। 

स्टार्ट-अप्स आमतौर पर ऐसी ऐसी समस्याओं का समाधान करने में भरोसा रखते हैं, जिसका पहले से कोई समाधान मौजूद नहीं रहता है। ये समाधान प्रोडक्ट के रूप में भी हो सकता है और सर्विस के रूप में भी। स्टार्ट अप्स काफी तेजी के साथ ग्रोथ करने पर जोर देते हैं, पारंपरिक बिजनेस में ऐसा नहीं देखा जा सकता है। इसके अलावा, दोनों में कई और बुनियादी फर्क हैं। 

स्टार्ट अप्स भले ही हमारी जिंदगी को आसान में बनाने में महत्वपूर्व भमिका निभा रहे हैं, लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक, महज 10 प्रतिशत स्टार्ट अप ही सफल हो पाते हैं, बाकी 90 प्रतिशत नाकाम हो जाते हैं। पूंजी की कमी इसकी एक प्रमुख वजह मानी जाती है।  

स्टार्ट अप्स के लिए इनकम टैक्स लाभ:

आप भी अगर स्टार्ट अप की प्लानिंग कर रहे हैं तो भारत में इससे इनकम टैक्स के कई लाभ मिलते हैं। इसमें शामिल हैं: 

  • नए पात्र स्टार्ट-अप को एलटीसीजी (लंबी अवधि पूंजीगत लाभ) पर टैक्स लाभ मिलता है। 
  • एक शख्स वाले नए स्टार्ट अप में निवेश पर भी टैक्स लाभ मिलता है।
  • ₹100 करोड़ नेटवर्थ या ₹250 करोड़ का कारोबार करने वाली सूचीबद्ध कंपनियों के पात्र स्टार्ट-अप में निवेश पर इनकम टैक्स छूट मिलती है।
  • कोई भी स्टार्ट-अप, जिनका सालाना कारोबार ₹100 करोड़ है, वे 10 साल के दौरान किसी भी तीन साल में टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं।
  • प्रवासियों, वैकल्पिक निवेश कोष-श्रेणी-1 द्वारा पात्र स्टार्टअप में ₹25 करोड़ की सीमा के ऊपर के निवेश पर इनकम टैक्स छूट मिलती है।

स्टार्टअप्स को पहले तीन साल की अवधि में होने वाले लाभ पर 100 प्रतिशत कर छूट मिलती है। इसके बाद होने वाले लाभ पर 15 प्रतिशत टैक्स देना होता है। हालांकि, इस योजना का लाभ लेने के लिए वित्तीय वर्ष के दौरान वार्षिक कारोबार 25 करोड़ रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए।

स्टार्ट अप्स के लिए इनकम टैक्स लाभ की शर्तें:

हालांकि, टैक्स लाभ लेने के लिए आपको कुछ शर्तों के पालन करना होगा। इन शर्तों में शामिल है: 

  • स्टार्ट-अप भारत में पंजीकृत हो।
  • अपनी स्थापना या पंजीकरण के बाद 10 साल तक परिचालन कर रही हो। पहले यह समयसीमा सात साल थी। 
  • उसका कारोबार पंजीकरण से लेकर अब तक किसी भी वित्त वर्ष में ₹100 करोड़ से ज्यादा नहीं हो। पहले यह ₹25 करोड़ था।
  • यह एक इकाई होनी चाहिए, जो प्रौद्योगिकी या बौद्धिक सम्पदा से प्रेरित नए उत्पादों या सेवाओं के नवाचार, विकास, प्रविस्तारण या व्यवसायीकरण की दिशा में काम करती हो।
  • ये इकाई पहले से अस्तित्व में व्यापार के विखंडन/पुनर्निर्माण द्वारा गठित नहीं की गई हो।

तो, अगर आपको लगता है कि आपके पास ऐसे आइडियाज हैं जिसे कारोबार में बदलकर आम लोगों की जिंदगी को आसान और बेहतर बनाया जा सकता है, तो स्टार्ट-अप्स को मिल रहे इनकम टैक्स लाभ का फायदा जरूर उठायें। 

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