शेयरों की बिक्री पर टैक्स: शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स, टैक्स देनदारी को कैसे कम करें | Taxes on sales of stocks

शेयरों में निवेश करते समय सही कर रणनीति अपनाकर आप कुल लाभ में भारी अंतर ला सकते हैं।

शेयरों की बिक्री पर लगने वाले करों के बारे में आपको क्या जानना चाहिए?

आज बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों से लेकर गृहिणियों, कामकाजी पेशेवरों और सेवानिवृत्त लोगों तक संपत्ति बनाने के उद्देश्य से शेयरों में सक्रिय रूप से कारोबार करते हैं। शेयर में निवेश करते समय जोखिम-उपयुक्त निवेश रणनीति अपनाने की जरूरत तो है ही साथ ही निवेश प्रक्रिया से होने वाली आय पर कैसे कर लगता है, वह समझना भी उतना ही जरूरी है। 

ऐसा करने के लिए सबसे पहले हमें शेयरों में निवेश प्रक्रिया से होने वाले पूंजीगत लाभ के प्रकार को पहचानना जरूरी है। सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों की बिक्री से प्राप्त आय को मुख्य तौर पर दो भागों में बांटा गया है:

  • शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) यदि कोई सूचीबद्ध स्टॉक खरीद की तारीख के 12 महीनों के भीतर बेचा जाता है।
  • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) अगर कोई लिस्टेड स्टॉक खरीद की तारीख से 12 महीने के बाद बेचा जाता है।

शेयरों की बिक्री पर लागू कर की दर क्या है?

a) शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी)

यदि लाभ को एसटीसीजी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, तो लाभ पर 15% + अधिभार और उपकर लगाया जाता है, भले ही व्यक्ति का कर स्लैब कुछ भी हो। 1 करोड़ रुपये तक की आय वाले निवासी व्यक्तियों के लिए प्रभावी कर की दर 17.16% है जबकि 1 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले एचयूएफ के लिए प्रभावी कर की दर 17.94% है।

मान लीजिए कि एक निवेशक ने 10 अप्रैल 2021 को कंपनी X के 100 शेयर 655 रुपये प्रति शेयर पर खरीदा और उन्हें 23 अगस्त 2021 को 697 रुपये पर बेच दिया।

ऐसे में कुल लाभ = 4200 . रुपये

प्रभावी एसटीसीजी कर 4200 x 17.16% = 720.27 रुपये होगा

संबंधित: लंबी अवधि के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर कराधान के प्रभाव को कैसे कम करें 

b) लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी)

यदि एक वित्त वर्ष में स्टॉक या इक्विटी म्युचुअल फंड की बिक्री से कुल एलटीसीजी 1 लाख रुपये से अधिक है, तो छूट वाली सीमा से ऊपर के लाभ पर 10% + अधिभार और उपकर लगाया जाएगा। 1 करोड़ रुपये तक की आय वाले निवासी व्यक्तियों और एचयूएफ के लिए प्रभावी कर की दर 11.44% है जबकि 1 करोड़ रुपये से अधिक आय पर 11.96% है।आप एलटीसीजी के बारे में कितना जानते हैं? इस प्रश्नोत्तरी से पता करें।

मान लीजिए कि एक निवेशक ने 10 अप्रैल 2015 को कंपनी X के 1000 शेयर 240 रुपये प्रति शेयर पर खरीदा और 23 अगस्त 2021 को 697 रुपये पर बेच दिया। 

ऐसे में, कुल लाभ = 4,57,000 रुपये

छूट की सीमा = रु 1,00,000

प्रभावी एलटीसीजी टैक्स 3,57,000 x 11.44% = 40,840 रुपये होगा

संबंधित: म्युचुअल फंड और उस पर कराधान के बारे में आपको क्या क्या जानना चाहिए? 

शेयरों की बिक्री से होने वाली आय पर कर देयता को कैसे कम करें

आप कर देयता से पूरी तरह तो नहीं बच सकते हैं लेकिन इसे कम जरूर कर सकते हैं। यहां जानिए कम करने के उपाय:

  • आयकर सीमा: यदि एक वित्त वर्ष के दौरान सभी स्रोतों से आपकी कुल आय 2.5 लाख रुपये की छूट सीमा से कम है, तो उक्त सीमा तक एसटीसीजी समायोजित किया जा सकता है। यदि लाभ सीमा से अधिक है, तो शेष राशि पर कर लगाया जाएगा। यदि एक वित्त वर्ष के दौरान आपकी कुल आय मूल छूट सीमा से अधिक है, तो आपको वित्त वर्ष के दौरान किए गए सभी अल्पकालिक लाभ पर कर का भुगतान करना होगा।
  • छूट की सीमा: एलटीसीजी के संबंध में 1 लाख रुपये तक का लाभ किसी भी कर से मुक्त है। जब तक बिल्कुल आवश्यक (जैसे, किसी आपात स्थिति या बाजार की बदलती परिस्थितियों के कारण) न हो, शेयरों की बिक्री से हुए अपने लाभ को उक्त सीमा के तहत रखने का प्रयास करें। यदि आपको लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए पैसों की जरूरत है, तो जरूरी होने पर कुछ साल पहले से होल्डिंग्स को धीरे-धीरे आंशिक रूप से कम करते जाएं। ध्यान रखें कि इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड की बिक्री को भी प्रत्यक्ष इक्विटी की बिक्री के अलावा 1 लाख रुपये की छूट सीमा के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है।
  • लाभ अर्जित करना: एलटीसीजी के तहत करदेयता को कम करने के लिए एक और तरीका अपना सकते हैं। इसके तहत एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये तक का मुनाफा बुक कर लें और इसे फिर से निवेश कर दें। इस रणनीति को हर साल परिसंपत्ति आवंटन को नियंत्रण में रखने और बिना किसी कर प्रभाव के पोर्टफोलियो विविधीकरण को बनाए रखने के लिए दोहराते रहें। 
  • नुकसान की भरपाई करना: शेयरों की बिक्री से होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई अन्य कैपिटल गेन्स से की जा सकती है। शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को किसी अन्य शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के बदले में समायोजित किया जा सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के खिलाफ ही समायोजित किया जा सकता है। यदि नुकसान पूरी तरह से समायोजित नहीं होता है, तो करदाता इसे बाद के आठ वर्षों तक के लिए आगे बढ़ा सकता है, जब तक कि वह नियत तारीख के भीतर अपना आईटी रिटर्न दाखिल करता है। लाभ के लिए ऐसा करने की आवश्यकता है, भले ही वित्त वर्ष के दौरान उनकी कुल करयोग्य आय आईटी छूट सीमा के भीतर क्यों ना हो।

डिस्क्लेमर

इस लेख का मकसद जानकारी देना है, निवेश की सलाह देना नहीं। शेयर या म्युचुअल फंड में निवेश करना जोखिमपूर्ण है। इसलिए निवेश करने से पहले खुद से फैसला लें या फिर किसी सलाहकार की मदद लें। 

संबंधित लेख