2021 में टैक्स कैसे बचाएं: एक क्विक गाइड | Tax saving guide for 2021:

दो में से कोई एक कर व्यवस्था चुनकर टैक्स बचाने के लिए यहाँ कुछ उपाय बताए गए हैं.

2021 में टैक्स कैसे बचाएं एक क्विक गाइड

वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए, आप दो में से किसी एक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अपनी टैक्स प्लानिंग कर सकते हैं. अगर आप पुरानी व्यवस्था का विकल्प चुनते हैं, तो आपके सैलरी कंपोनेंट्स पर टैक्स में अलग-अलग छूट का दावा किया जा सकता है, जिसमें हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए), ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस, चाइल्ड एजुकेशन, हॉस्टल सब्सिडी, होम लोन पर ब्याज आदि शामिल हैं. 

इसके अतिरिक्त, आयकर अधिनियम की निम्नलिखित धाराओं के तहत टैक्स में कटौती मिलती है: 

धारा 80सी, 80सीसीसी और 80सीसीडी (अधिकतम लाभ रु. 1.5 लाख)

टैक्स बचाने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 80सी के अंतर्गत कटौती के रूप में निर्दिष्ट विभिन्न विकल्पों के तहत निवेश किया जा सकता है. इसमें जीवन बीमा पॉलिसी का पेमेंट, 5 साल के बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट में निवेश, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान, नेशनल सेविंग्स स्कीम, सुकन्या समृद्धि योजना, सीनियर सिटिज़न सेविंग स्कीम, नेशनल पेंशन सिस्टम, होम लोन मूलधन चुकाने, इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम आदि जैसे टैक्स सेविंग्स विकल्प शामिल हैं.

लाइफ इंश्योरेंस एन्युटी प्लान में पेंशन फंड कॉन्ट्रिब्यूशन, धारा 80सीसीसी के अंतर्गत कटौती के रूप में उपलब्ध हैं. केंद्र सरकार के पेंशन फंड पर भी धारा 80सीसीडी के अंतर्गत कटौती की जाती है.

धारा 80डी (अधिकतम लाभ रु. 1.05 लाख)

अगर टैक्सपेयर और उसके माता-पिता भी 60 वर्ष से अधिक आयु के हैं, तो 1 लाख रुपये तक के मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम पर कटौती का लाभ मिलता है. पति/पत्नी, माता-पिता और बच्चों के हेल्थ चेक-अप के लिए 5000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का लाभ भी ले सकते हैं. सेक्शन 80डी के अंतर्गत टैक्सपेयर, उनके जीवनसाथी और बच्चों के लिए 25,000 रुपये तक का डिडक्शन मिलता है. 60 वर्ष से कम आयु के माता-पिता के लिए 25,000 रुपये और 60 वर्ष से अधिक आयु के माता-पिता के लिए 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का लाभ भी ले सकते हैं. 

धारा 80डीडी (अधिकतम लाभ रु. 1.25 लाख)

40% -80% विकलांगता वाले आश्रित विकलांग रिश्तेदार की देखभाल, ट्रेनिंग और रिहैबिलिटेशन खर्च के लिए 75,000 रुपये की कटौती का लाभ भी ले सकते हैं. अगर विकलांगता 80% से अधिक है तो कटौती बढ़कर 1.25 लाख रुपये हो जाती है.

धारा 80डीडीबी (अधिकतम लाभ रु. 1 लाख)

आपके या आपके आश्रित की ख़ास मेडिकल कंडीशन के इलाज के लिए 40,000 रुपये की कटौती का लाभ भी ले सकते हैं. अगर इलाज 60 साल से ऊपर के व्यक्ति के लिए है तो 1 लाख रुपये की कटौती का लाभ भी ले सकते हैं.

धारा 80टीटीए (अधिकतम लाभ रु. 10,000)

इस सेक्शन के तहत आप बैंक, कोऑपरेटिव सोसाइटी या पोस्ट ऑफिस में अपने सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज पर 10,000 रुपये तक की कटौती क्लेम कर सकते हैं. आय का खुलासा 'अन्य स्रोतों से आय' के अंतर्गत किया जाना चाहिए.

धारा 80जीजी (अधिकतम लाभ रु. 60,000)

अगर आप किराए के मकान में रहते हैं लेकिन एचआरए आपके वेतन का हिस्सा नहीं है, तो आप इस सेक्शन के तहत कटौती क्लेम कर सकते हैं. अधिकतम कटौती का कैलकुलेशन निर्धारित फॉर्मूले से किया जाता है और यह प्रति माह 5000 रुपये तक हो सकती है.

धारा 80ई (अधिकतम लाभ की कोई सीमा नहीं)

हायर स्टडीज़ के लिए लिए गए एजुकेशन लोन पर दिए गए ब्याज पर कटौती क्लेम कर सकते हैं. ये हायर स्टडीज़ आप, पति या पत्नी में से कोई भी, आपके बच्चे या कानूनी संतान कर रहे हो सकते हैं.

धारा 80ईई (अधिकतम लाभ 50,000 रुपये)

अगर आप पहली बार घर खरीदने वाले हैं तो होम लोन के ब्याज वाले हिस्से पर 50,000 रुपये तक की कटौती क्लेम कर सकते हैं. धारा 80ईई के विस्तार के रूप में, निर्धारण वर्ष 2020-21 से धारा 80ईईए को, होम लोन के ब्याज पर 1.5 लाख रुपये के लाभ के साथ प्रस्तुत किया गया है.   

धारा 80यू (अधिकतम लाभ रु. 1.25 लाख)

नेत्रहीन और मानसिक विकलांगता के साथ शारीरिक अक्षमता से पीड़ित निवासी व्यक्ति के लिए 75,000 रुपये की कटौती क्लेम कर सकते हैं. गंभीर विकलांगता के मामले में, 1.25 लाख रुपये की कटौती क्लेम कर सकते हैं.

धारा 80जी (अधिकतम लाभ की कोई सीमा नहीं)

ख़ास सामाजिक कारणों के लिए कोई योग्यता सीमा नहीं है और मिले दान के लिए 100% कटौती क्लेम कर सकते हैं. तीन अन्य श्रेणियां भी उपलब्ध हैं: ख़ास दान पर 50% कटौती, 100% कटौती जो सकल कुल आय (जीटीआई) के 10% के अधीन होगी और 50% कटौती जो सकल कुल आय (जीटीआई) के 10% के अधीन होगी. 

धारा 80जीजीसी (अधिकतम लाभ की कोई सीमा नहीं)

किसी राजनीतिक दल को दिए गए योगदान पर कटौती क्लेम कर सकते हैं बशर्ते योगदान नकद में नहीं किया गया हो.

धारा 80आरआरबी (अधिकतम लाभ रु. 3 लाख)

आप पेटेंट की रॉयल्टी के रूप में प्राप्त 3 लाख रुपये तक की आय पर कटौती क्लेम कर सकते हैं.

धारा 80टीटीबी (अधिकतम लाभ 50,000 रुपये)

वरिष्ठ नागरिकों अपने डिपॉज़िट पर कमाए 50,000 रुपये तक के ब्याज पर कटौती क्लेम कर सकते हैं.

धारा 24 (अधिकतम लाभ 2,00,000 रुपये)

2 लाख रुपये तक के होम लोन पर ब्याज चुकाने पर धारा 24 के तहत कटौती क्लेम कर सकते हैं. धारा 24 और धारा 80ईईए दोनों के लिए जो टैक्सपेयर योग्य हैं वे पहले धारा 24 के तहत कटौती क्लेम कर सकते हैं, और फिर धारा 80ईईई के अंतर्गत क्लेम का लाभ उठा सकते हैं.

धारा 24 जोड़ें होम लोन का ब्याज (अधिकतम 2 लाख)

इससे मिलती-जुलती: आयकर अधिनियम की धारा 80 के तहत कटौती का लाभ

अगर आप नई कर व्यवस्था चुनते हैं तो क्या होगा?

अगर आप नई कर व्यवस्था का विकल्प चुनते हैं, तो आप पुरानी व्यवस्था के तहत उपलब्ध लगभग 70 टैक्स सेविंग्स स्कीम, छूट और कटौती क्लेम करने का लाभ नहीं ले पाएंगे. इससे आपकी टैक्सेबल आय बढ़ेगी. हालांकि, नई व्यवस्था में कम दरों के कारण आयकर बचत का लाभ आपके टैक्स डिडक्शन और छूट की कमी को पूरा करता है. नई टैक्स व्यवस्था के तहत समझदारी से निवेश करने के लिए ये 5 टिप्स देखें.

नई व्यवस्था के अंतर्गत भी उपलब्ध रहने वाली कटौतियों में शामिल हैं:

  • एनपीएस और ईपीएस में नियोक्ता का योगदान.
  • ईपीएफ पर 9.5 फीसदी तक ब्याज.
  • नई व्यवस्था के अंतर्गत, गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए 20 लाख रुपये की सीमा तक मिलने वाली ग्रेच्युटी पर छूट मिलती है.
  • डाकघर बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज.
  • लाइफ इंश्योरेंस का मैच्योरिटी अमाउंट.
  • पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना की ब्याज आय और मैच्योरिटी अमाउंट.
  • एनपीएस खाता मैच्योर होने पर मिलने वाली एकमुश्त राशि.
  • गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए 3 लाख रुपये तक का लीव एनकैशमेंट.
  • वोलंटरी रिटायरमेंट के लाभ 5 लाख रुपये तक.

​इससे मिलती-जुलती: क्या आपको पुरानी कर व्यवस्था पर बने रहना चाहिए या नई कर व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहिए?

दोनों व्यवस्थाओं के अंतर्गत आप यह तुलना कर सकते हैं कि आपको कितना टैक्स देना है और यह पता लगा सकते हैं कि आपको किसमें कम टैक्स भरना पड़ रहा है. एक बार जब आप अपने लिए सही व्यवस्था की पहचान कर लेते हैं, तो आप अपनी टैक्स सेविंग को बढ़ाने के लिए निवेश विकल्प चुन सकते हैं. नई कर व्यवस्था या पुरानी कर व्यवस्था: किसे चुनना चाहिए?

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