संपत्ति के बदले कर्ज लेना क्‍या होता है?

एक ऐसा ऋण चाहते हैं जो हर महीने आपकी आय में से एक बड़ा हिस्सा ईएमआई के रूप में न निकाल ले? आपको ऐसे ही कारणों के चलते मॉर्गेज का विकल्प चुनना चाहिए।

संपत्ति गिरवी रखकर कर्ज लेने के फायदे

जैसा कि नाम से पता चलता है, एक संपत्ति के बदले ऋण (एलएपी) रियल एस्‍टेट संपत्ति के बदले में प्राप्‍त हुआ कर्ज होता है। यह कर्ज सिक्योर्ड लोन की श्रेणी में आता है, जहां व्‍यक्ति अपना घर, जमीन, या बिल्‍डिंग को कोलेटरल के रूप में पेश करके व्यक्तिगत या व्यावसायिक जरूरतों के लिए लोन ले सकता है।

ऋण की पेशकश की गणना उक्त संपत्ति के बाजार मूल्य के एक निश्चित प्रतिशत के आधार पर की जाती है, और यह आमतौर पर संपत्ति के 40% और 60% (कुछ मामलों में 75% तक जा सकती है) के बीच होती है।

कर्ज लेने का उद्देश्‍य 

किसी बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के पास संपत्ति गिरवी रखकर एलएपी का लाभ उठाया जा सकता है। यह किसी भी उद्देश्य के लिए लिया जा सकता है- आप शादी की प्‍लानिंग के लिए फंड का उपयोग कर सकते हैं, किसी बीमारी के इलाज के खर्च का भुगतान कर सकते हैं, विदेश में अध्ययन कर सकते हैं या पुराना ऋण चुकता कर सकते हैं।

आमतौर पर व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए या अन्य ऋण दायित्वों की भरपाई के लिए यह कर्ज लिया जाता है, क्योंकि एलएपी पर ब्याज अन्य माध्‍यम (जैसे व्यक्तिगत ऋण) की तुलना में बहुत कम है। एलएपी आपकी संपत्ति को बेचे बिना बड़ा कर्ज प्राप्‍त करने का अवसर प्रदान करता है, जो आमतौर पर इसमें लंबी अवधि में कीमतों में वृद्धि की भी संभावना होती है।         

ब्‍याज दरें और अवधि 

ऋण राशि और ब्याज दर कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे कि संपत्ति का वर्तमान बाजार मूल्य, कर्ज लेने वाले की क्रेडिट प्रोफ़ाइल और क्रेडिट रेटिंग, अन्य ऋणों के पुनर्भुगतान का ट्रैक रिकॉर्ड, कर्ज, क्रेडिट कार्ड आदि, व्यवसाय और आय के सभी स्रोत, और ऋण लेने वाले की अन्य संपत्तियां आदि।

इसमें ब्याज की दर 8.8% से 14% के बीच होती है, जिसमें अधिकांश वित्तीय संस्थानों की औसत दर 10.5% हैं। ऋण राशि जितनी अधिक होगी, अधिक ब्याज की बाध्यता उतनी ही अधिक होगी।

कर्ज लेने वाले व्‍यक्ति के पास ब्याज की फिक्‍स या फ्लोटिंग दर चुनने का विकल्प होता है। फ्लोटिंग रेट प्‍लान की तुलना में फिक्स्ड रेट लोन मामूली रूप से अधिक महंगा होता है। इसके अलावा, ये एक रीसेट क्‍लॉज़ के साथ आते हैं, जो कि आमतौर पर 3 साल होता है। लेकिन विभिन्‍न बैंकों के मामले में ये नियम अलग-अलग हो सकता है। 

फिक्‍स प्‍लान में ब्‍याज की दर पूरी ऋण अवधि में एक समान होती है, जबकि एक फ्लोटिंग प्लान में समय-समय पर बैंक या एनबीएफसी के फंड्स आधारित मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) और प्राइम लेंडिंग रेट (पीएलआर) के आधार पर इसकी समीक्षा की जाती है। ज्‍यादातर लोन लेने वाले लोग फ्लोटिंग रेट पर ऋण लेना पसंद करते हैं क्योंकि यह प्रचलित ब्याज दर परिदृश्य के साथ ब्याज दरों में बदलाव की सुविधा प्रदान करता है। 

ज्यादातर बैंक 10 से 15 साल का लोन देते हैं। कुछ मामलों में इसे 25 साल तक भी बढ़ाया जा सकता है। लोन की अवधि काफी हद तक कर्ज लेने वाले व्‍यक्ति की उम्र से भी जुड़ी होती है। 50 वर्ष से अधिक आयु के आवेदकों को आमतौर पर 5-7 वर्ष से अधिक की अवधि का कर्ज नहीं दिया जाता है। 

पात्रता मापदंड

अधिकांश बैंक और एनबीएफसी अपनी वेबसाइट पर एक ऑनलाइन पात्रता कैलकुलेटर की सुविधा प्रदान करते हैं, यदि आप एलएपी के लिए पात्र हैं तो ये लोन अवधि और ब्याज दर का अनुमान लगाने में आपकी मदद कर सकता है। बुनियादी आवश्यकताएं इस प्रकार हैं:

  • जिस संपत्ति के बदले ऋण की मांग की जाती है, उसके टाइटल में कर्ज लेने वाले का नाम स्पष्ट रूप से होना चाहिए। 
  • कर्ज लेने वाला भारत का नागरिक होना चाहिए, जिसकी उम्र 21 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए। 
  • नौकरीपेशा आवेदकों के लिए, कम से कम तीन साल के कार्य अनुभव के साथ मासिक आय 40,000 रुपए से अधिक होनी चाहिए। 
  • स्‍व-रोजगार/कारोबारी के मामले में, वार्षिक आय 3 लाख रुपए से अधिक होनी चाहिए और कारोबार कम से कम 5 साल पुराना होना चाहिए। 
  • कर्ज लेने वाले का क्रेडिट स्‍कोर (सिबिल) 900 में से कम से कम 650 अवश्‍य होना चाहिए। 

दस्‍तावेज

प्रत्येक वित्तीय संस्थान की अपनी अलग जरूरतें होती हैं; लेकिन एलएपी के लिए आवश्यक दस्तावेजों की यह मानक सूची है:

  • रजिस्‍टर्ड सेल डीड (पिछली बिक्री की श्रंखला सहित) और म्‍युनिसिपल टैक्‍स के रिकॉर्ड। 
  • पैन और आधार के साथ, आवेदक के केवाईसी दस्‍तावेज और पते का प्रमाण। 
  • नौकरीपेशा आवेदकों के लिए: तीन महीने की सैलरी स्लिप, फॉर्म 16, मौजूदा नियोक्‍ता की ओर से नौकरी का सार्टिफिकेट, और पिछले 6 महीनों का बैंक स्‍टेटमेंट। 
  • स्‍व-रोजगार आवेदक के लिए: कारोबार के स्‍वामित्‍व का प्रमाण, पिछले तीन साल के ऑडिट किए गए आईटी रिटर्न, और पिछले 12 महीनों का बैंक स्‍टेटमेंट। 
  • क्रेडिट स्‍कोर की कॉपी। 
  • लोन का उद्देश्य बताते हुए घोषणापत्र।
  • निवेशों और अन्‍य संपत्तियों (यदि कोई है) की सूची। 
  • प्रोसेसिंग चैक और पासपोर्ट साइज फोटो। 

एलएपी के फायदे 

5 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की राशि के साथ, एलएपी एक बड़ी राशि हासिल करने में मदद कर सकता है। इतनी बड़ी राशि जुटाना आम कारोबारी या व्यक्तिगत ऋण के माध्यम से संभव नहीं हो सकता है।

बैंक या वित्तीय संस्थान के पास गिरवी होने के बावजूद ऋण लेने वाला व्‍यक्ति उस एसेट का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होता है। वहीं दूसरी ओर उस संपत्ति के मूल्‍य में वृद्धि भी जारी रहती है। यदि जरूरत हो, तो ऋण लेने वाला व्‍यक्ति नए मूल्यांकन के आधार पर ऋण पर टॉप-अप का लाभ भी उठा सकता है।

चूंकि परिसंपत्ति को कोलेटरल के रूप में रखा जाता है, इसलिए एलएपी पर ब्याज की दर असुरक्षित ऋण की तुलना में बहुत कम होगी। जहां व्‍यक्तिगत ऋण की दरें 16% से 18% से शुरू होती हैं वहीं कोई भी व्‍यक्ति लगभग 10% की दर से एलएपी प्राप्‍त कर सकता है। 

फ्लोटिंग दर ब्याज के साथ एलएपी में कोई पूर्व भुगतान शुल्क नहीं होता है। साथ ही ऋण भुगतान की अवधि अन्य व्यक्तिगत/व्यावसायिक ऋण (आमतौर पर अधिकतम सात साल) की तुलना में काफी अधिक होती है, जिससे सस्ती ईएमआई का फायदा मिलता है।

संपत्ति के बदले ऋण लेने समय सभी बैंकों और एनबीएफसी की पड़ताल करें। अपनी जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए सबसे बेहतर विकल्‍प का चयन करने से पहले, ब्याज दर के अलावा अन्य कारकों जैसे लोन अवधि, भुगतान के विकल्‍प आदि की भी पड़ताल करें। 

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