Tax consequneces you must know about while investing

यहां कुछ लोकप्रिय निवेश विकल्पों के बारे में बताया गया है, और उनसे सम्बंधित कर नियमों के बारे में भी, जिसकी आपको जानकारी होनी चाहिए।

यदि आप अपने निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो इन कर निहितार्थों से सावधान रहें

कोरोनवायरस महामारी ने विश्व की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाला है। कई संगठन कर्मचारियों को हटाने या वेतन कम करने के लिए मजबूर हो गए है। जाहिर है, हम में से कई लोग वित्तीय परेशानियों से जूझ रहे हैं। जबकि घरेलू खर्च में कोई कमी नहीं है, रहने का खर्च, किराया, ऋण, आदि पहले की तरह जारी है।

किसी भी कमी की पूर्ति के लिए, लोग अपनी बचत और निवेश के उपयोग के लिए मजबूर हो रहे हैं। यदि आप भी विभिन्न निवेशों से पैसे निकालने पर विचार कर रहे हैं, तो किसी भी अर्थदंड या कर निहितार्थ के प्रति सावधान रहें, जो आपके कर देता के बोझ को और बढ़ा सकता है।

आइए कुछ लोकप्रिय निवेश विकल्पों पर नज़र डालें, और उससे सम्बंधित कर नियम,जिससे आपको अवगत होना चाहिए।

सार्वजनिक भविष्य निधि (पी.पी.एफ.)

पी.पी.एफ. एक बेहद लोकप्रिय निवेश इंस्ट्रूमेंट है जो छूट-छूट-छूट (ईईई) श्रेणी के अंतर्गत आता है, जहां निवेश, संचित ब्याज, और साथ ही निकासी पर कर से छूट मिलती है।यह निवेश आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत आता है और आपको एक वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक कर कटौती की अनुमति देता है।

पी.पी.एफ. में 15 साल का लॉक-इन कार्यकाल है; लेकिन आप पांच साल के बाद ,उस खाते से आंशिक निकासी कर सकते हैं। चौथे वर्ष के अंत में संचित बैलेंस राशि की 50% सीमा तक ही आप पैसे निकाल सकते हैं।

आप समय से पहले पी.पी.एफ. खाते को बंद कर सकते हैं, लेकिन यह केवल जीवन-नाशक बीमारी के इलाज के लिए ही अनुमत है। पी.पी.एफ. खाते से निकासी को कर से छूट दी गई है; इसलिए इससे आपके कर देयता पर कोई अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा।

कर्मचारी भविष्य निधि (इ.पी.एफ.)

इ.पी.एफ. एक पी.पी.एफ. के समान कार्य करता है, लेकिन इसकी लॉक-इन अवधि काम होती है ,केवल पाँच वर्ष। आपातकालीन स्थिति में आंशिक निकासी की अनुमति दी जाती है। महामारी को देखते हुए, ईपीएफओ ने अपने ग्राहकों को तीन माह के मूल वेतन और महंगाई भत्ता या खाते में से 75% धनराशि, जो भी कम हो,उतनी निकालने की अनुमति दी है।

ग्राहकों के लिए कोई कर निहितार्थ नहीं हैं; ऑनलाइन ई.पी.एफ.ओ. पोर्टल के माध्यम से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) को एक्टिवेट करके राशि आसानी से निकाली जा सकती है |

राष्ट्रीय पेंशन योजना (एन.पी.एस.)

प्रोविडेंट फंड विकल्पों की तरह, एनपीएस भी ईईई श्रेणी में आता है। यह ग्राहक की सेवानिवृत्ति पर, या 60 वर्ष की आयु तक पहुंचने पर मैच्योर होता है। मैच्योर होने पर, कोष के 40% को अनिवार्य रूप से एक वार्षिकी में निवेश करना पड़ता है, जबकि शेष 60% ग्राहक द्वारा निकाला जा सकता है।

एनपीएस से आंशिक निकासी की अनुमति -एक घर बनाने, चिकित्सा आपातकाल, बच्चों की शिक्षा / शादी के लिए भुगतान करने जैसे निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए दी जाती है, एक ग्राहक को परिपक्वता से पहले अधिकतम तीन बार निकासी (उनके बीच न्यूनतम पांच साल के अंतराल ज़रूरी है ) की अनुमति है जो कोष के 25% से अधिक नहीं होना चाहिए और सदस्यता के तीसरे वर्ष के बाद ही मान्य होगा ।

कोरोनोवायरस को एक गंभीर बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया गया है, इसलिए एन.पी.एस. सब्सक्राइबर ऊपर उल्लिखित स्थिति के अधीन,अपने इलाज के लिए आंशिक निकासी कर सकते हैं (यदि परिक्षण पर पॉजिटिव पाया जाता है)।

बैंक / डाकघर फिक्स्ड डिपॉज़िट (एफ.डी.)

एफ.डी. में मूल निवेश कर योग्य नहीं होती है, लेकिन ब्याज आय होती है। कर की मात्रा निर्धारिती के समग्र कर श्रेणी पर निर्भर करती है। हालांकि, टर्म डिपॉज़िट पर समय से पहले निकासी अनुमत है, बैंक या वित्तीय संस्थान जमा की अवधि के आधार पर ब्याज प्रदान करते हैं । यह ब्याज राशि पर अर्थदंड (प्रतिशत के रूप में) भी लगा सकता है।

हर बैंक की शर्तें अलग-अलग होंगी, इसलिए अर्थदंड के बारे में समझने के लिए अपने बैंक के प्रतिनिधि से बात करना सबसे अच्छा रहेगा ।

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी)

एन.एस.सी. सरकार द्वारा समर्थित बचत इंस्ट्रूमेंट है जो देश भर के डाकघरों के माध्यम से पेश किया जाता है। किसी एनएससी पर रिटर्न निश्चित होता है, लेकिन कुल ब्याज पर कर छूट नहीं है। मैच्युरिटी अवधि निवेश किए गए विशिष्ट अंक पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए,एनएससी VIII की मैच्युरिटी अवधि पांच साल है जबकि एनएससी IX की 10 साल की निवेश अवधि है।

एनएससी से पैसे निकालने के लिए, आपको एक राजपत्रित सरकारी अधिकारी से लिखित पत्र प्रस्तुत करना होगा । यदि खरीद के बाद केवल एक वर्ष ही बीता है, तो कोई ब्याज देय नहीं होगा। इस अवधि के बाद के समय में पूंजी ब्याज के साथ देय होगी, जो ग्राहक के समग्र कर ब्रैकेट में कर योग्य होगी ।

स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड

स्टॉक या इक्विटी-आधारित म्यूचुअल फंड बेचने पर कर निहितार्थ होल्डिंग की अवधि पर निर्भर करता है। यदि उक्त इकाइयों को 12 महीने से कम अवधि के लिए रखा गया है, तो 15% का अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (एस.टी.सी.जी.) कर लागू होगा। एक साल से अधिक की होल्डिंग अवधि के लिए, इंडेक्सेशन बेनेफिट्स के बिना 10% पर लघु कालिक पूंजीगत लाभ (एल.टी.सी.जी.) कर लगेगा। हालांकि, यह कर तभी लागू होता है जब किसी वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक लाभ हुआ हो।

दूसरी ओर, लिक्विड / डेब्ट-आधारित म्यूचुअल फंड्स की बिक्री को अल्पकालिक लाभ के लिए लागू कर स्लैब में और दीर्घकालिक लाभ के लिए 20% पर कर देना होगा।

आखरी शब्द

यह महत्वपूर्ण है कि आप किसी निवेश से पैसे केवल तभी निकालें जब यह बहुत आवश्यक हो या जब ये आवश्यक खर्चों के लिए हो। यदि आप कोई निकासी करने का निर्णय लेते हैं, तो किसी भी दंड शुल्क या अतिरिक्त कर देनदारियों को जाँच लें ताकि आपको बाद में झटका न लगे। संभावनाएं हैं कि सरकार पूंजीगत लाभ पर दंड शुल्क या टैक्स ब्रेक पर कुछ राहत प्रदान कर सकती है ताकि निवेशकों के हाथों में थोड़ी अतिरिक्त तरलता प्रदान की जा सके।

संवादपत्र

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